Sorry Shayari : Maafi Shayari – Mafi Shayari images – Sorry Shayari In Hindi – Sorry Shayari Image

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Sorry Shayari Maafi Shayari

Sorry Shayari Maafi Shayari

Umr Tamaam Bahaar Ki Ummid Mein Gujar Gayi,
Bahaar Aayi Hai Toh Maut Ka Paigaam Layi Hai.
उम्र तमाम बहार की उम्मीद में गुजर गयी,
बहार आई है तो पैगाम मौत का लाई है


Ab Maut Se Keh Do Narajgi Khatm Kar Le
Woh Badal Gaya Hai Jiske Liye Hum Zinda The
अब मौत से कह दो कि नाराज़गी खत्म कर ले
वो बदल गया है जिसके लिए हम ज़िंदा थे​


Main Ab Supurde-Khaak Hun Mujhko Jalana Chhod De
Qabr Par Meri Tu Uske Saath Aana Chhod De
Ho Sake Gar Tu Khushi Se Ashq Peena Seekh Le
Ya Tu Aankhon Mein Apni Kajal Lagana Chhod De

Sorry Shayari

Sorry Shayari

 

Tu Badnaam Na Ho Isliye Jee Raha Hun Main,
Varna Marne Ka Irada Toh Roj Hota Hai.
तू बदनाम ना हो इसलिए जी रहा हूँ मैं,
वरना मरने का इरादा तो रोज होता है

Sorry Shayari : Maafi Shayari

Na Udhaao Yun Thokro Mein Meri Khak-e-Kabr Zalim,
Yehi Ek Rah Gayi Hai Mere Pyaar Ki Nishaani.
न उड़ाओ यूं ठोकरों से मेरी खाके कब्र ज़ालिम,
यही एक रह गई है मेरे प्यार की निशानी


Maafi Shayari

Maafi Shayari

Teri Hi Justjoo Mein Ji Lee Ek Zindagi Maine,
Gale Mujhko Lagakar Khatm Saanso Ka Safar Kar De
तेरी ही जुस्तजू में जी लिया इक ज़िंदगी मैंने,
गले मुझको लगाकर खत्म साँसों का सफ़र कर दे


Maut-o-Hasti Ki KashmKash Mein Kati Tamaam Umr
Gam Ne Jeene Na Diya Shauq Ne Marne Na Diya
मौत-ओ-हस्ती की कशमकश में कटी उम्र तमाम
गम ने जीने न दिया शौक ने मरने न दिया


Tasawar Mein Na Jaane Katib-e-Taqdir Kya Tha
Mera Anjaam Likha Hai Mere Aagaaz Se Pahle
तसव्वर में न जाने कातिबे-तकदीर क्या था
मेरा अंजाम लिखा है मेरे आगाज से पहले


मैं अब सुपुर्दे ख़ाक हूँ मुझको जलाना छोड़ दे,
कब्र पर मेरी तू उसके साथ आना छोड़ दे,
हो सके गर तू खुशी से अश्क पीना सीख ले,
या तू आँखों में अपनी काजल लगाना छोड़ दे


Wo Kar Nahi Rahe The Meri Baat Ka Yakeen,
Phir Yun Hua Ke Mar Ke Dikhana Pada Mujhe.
वो कर नहीं रहे थे मेरी बात का यकीन,
फिर यूँ हुआ के मर के दिखाना पड़ा मुझे

Mafi Shayari images

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मेरी फितरत मेँ नहीँ अपना ग़म बयां करना
अगर तेरे वजूद का हिस्सा हूँ तो महसूस कर तकलीफ मेरी

जो तुम बोलो बिखर जाएँ जो तुम चाहो संवर जायें
मगर यूँ टूटना जुड़ना बहुत तकलीफ देता है


कीमत बता तू मुझे,सजा-ए-मोहब्बत से रिहाई की
बहुत तकलीफ होती है तेरी यादों की सलाखों में

निगाहों से क़त्ल कर डालो, न हो तकलीफ दोनों को
तुम्हें खंजर उठाने की हमें गर्दन झुकाने की


मौत सिर्फ नामसे बदनाम है
वरना तकलीफ़ तो जिंदगी ही ज्यादा देती है
और बीवी बी सिर्फ नाम से बदनाम है
वरना तकलीफ़ में सिर्फ वही साथ देती है


पहाड़ो जैसे सदमे झेलती है उम्र भर लेकिन
बस इक औलाद की तकलीफ़ से माँ टूट जाती है

पत्थरों से प्यार किया नादान थे हम
गलती हुई क्योकि इंसान थे हम
आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती हैं,
कभी उसी शख्स की जान थे हम


एय मेरी जिन्दगी यूँ मुझसे दगा ना कर
उसे भुला कर जिन्दा रहू दुआ ना कर
कोई उसे देखता हैं तो होती हैं तकलीफ
एय हवा तू भी उसे छुवा ना कर

Sorry Shayari In Hindi

Sorry Shayari In Hindi

कहीं पर शाम ढलती है कहीं पर रात होती है
अकेले गुमसुम रहते हैं न किसी से बात होती है
तुमसे मिलने की आरज़ू दिल बहलने नहीं देती
तन्हाई में आँखों से रुक-रुक के बरसात होती है


तेरे आने की खबर मुझे ये हवाएं देती हैं
तेरे मिलने को मेरी हर साँस तरसती है
तू कब आके मिलेगी अपने इस दीवाने से
तुझसे मिलने को मेरी आवाज तरसती है


हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले,
न कभी हमारे कदम बढ़े न कभी तुम्हारी झिझक गई

तू नहीं तो ज़िंदगी में और क्या रह जायेगा
दूर तक तन्हाइयों का सिलसिला रह जायेगा
आँखें ताजा मंजरों में खो तो जायेंगी मगर
दिल पुराने मौसमों को ढूंढ़ता रह जायेगा


तेरे बिना ये कैसे गुजरेंगी मेरी रातें
तन्हाई का गम कैसे सहेंगी ये रातें
बहुत लम्बी हैं ये घड़ियाँ इंतज़ार की
करबट बदल-बदल के कटेंगी ये रातें


फिर कहीं दूर से एक बार सदा दो मुझको
मेरी तन्हाई का एहसास दिला दो मुझको
तुम तो चाँद हो तुम्हें मेरी ज़रुरत क्या है
मैं दिया हूँ किसी चौखट पे जला दो मुझको

Sorry Shayari Image

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सुकून अपने दिल का मैंने खो दिया
खुद को तन्हाई के समंदर मे डुबो दिया
जो थी मेरे कभी मुस्कराने की वजह
उसकी कमी ने मेरी पलकों को भिगो दिया


उस से बिछड़े तो मालूम हुआ
की मौत भी कोई चीज़ है फ़राज़
ज़िन्दगी वो थी जो हम
उसकी महफ़िल में गुज़ार आए


एक पल का एहसास बनकर आते हो तुम
दुसरे ही पल ख्वाब बनकर उड़ जाते हो तुम
जानते हो की लगता है डर तन्हाइयों से
फिर भी बार बार तनहा छोड़ जाते हो तुम


मेरी मोहब्बत है वो कोई मज़बूरी तो नही
वो मुझे चाहे या मिल जाये, जरूरी तो नही
ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसों में वो
सामने हो मेरी आँखों के जरूरी तो नही

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